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राग एवं थाट
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स्वर, स्वरलिपि और विद्यालय पाठ्यक्रम के राग
From sound to swara — नाद, श्रुति, स्वर
नाद — musical sound. Tradition names two kinds: आहत नाद, produced by striking or contact and heard by the ear, and अनाहत नाद, the 'unstruck' sound of meditation. Music is made from आहत नाद.
श्रुति — the smallest interval of pitch the ear can distinguish within an octave. Indian theory counts 22 श्रुतियाँ in a saptak, and the swaras are placed on particular shrutis.
स्वर — 12 in all:
| Kind | Swaras |
|---|
| शुद्ध (natural) | सा रे ग म प ध नि | 7 |
| कोमल (flat) | रे ग ध नि | 4 |
| तीव्र (sharp) | म | 1 |
अचल स्वर — सा and प never change; they have no komal or tivra form. The other five are चल (movable).
सप्तक — a run of seven swaras:
The तार सा vibrates at twice the frequency of the मध्य सा — the 2 : 1 ratio that makes an octave sound like 'the same note, higher'.
The trap: only म has a तीव्र form; रे, ग, ध, नि have कोमल forms — so there are 4 komal swaras and 1 tivra, not 5 of each.
ध्वनि से स्वर तक — नाद, श्रुति, स्वर
नाद — संगीतोपयोगी ध्वनि। परंपरा इसके दो प्रकार बताती है: आहत नाद, जो आघात या स्पर्श से उत्पन्न होकर कान से सुना जाता है, और अनाहत नाद, ध्यान का 'अनाहत' नाद। संगीत आहत नाद से बनता है।
श्रुति — सप्तक के भीतर स्वर-ऊँचाई का वह सबसे छोटा अंतर जिसे कान पहचान सके। भारतीय सिद्धांत एक सप्तक में 22 श्रुतियाँ गिनता है, और स्वर विशेष श्रुतियों पर स्थित होते हैं।
स्वर — कुल 12:
| प्रकार | स्वर | संख्या |
|---|---|---|
| शुद्ध | सा रे ग म प ध नि | 7 |
| कोमल | रे ग ध नि | 4 |
| तीव्र | म | 1 |
अचल स्वर — सा और प कभी नहीं बदलते; उनका कोई कोमल या तीव्र रूप नहीं। शेष पाँच चल स्वर हैं।
सप्तक — सात स्वरों की शृंखला:
तार सा मध्य सा की दोगुनी आवृत्ति पर कंपन करता है — 2 : 1 का वह अनुपात जिससे सप्तक 'वही स्वर, ऊँचा' सुनाई देता है।
जाल: केवल म का तीव्र रूप है; रे, ग, ध, नि के कोमल रूप हैं — इसलिए कोमल स्वर 4 और तीव्र 1 हैं, दोनों 5-5 नहीं।
Writing music — स्वरलिपि, वर्ण and जाति
Bhatkhande's notation — the system most school books and examinations use:
| What | Sign |
|---|---|
| कोमल swara | a short line below — रे॒ ग॒ ध॒ नि॒ |
| तीव्र म | a short upright line above — म॑ |
| मंद्र saptak | a dot below the swara |
| तार saptak | a dot above the swara |
| a swara held for a beat | a dash — after it |
Vishnu Digambar Paluskar's notation uses different signs; a paper names which system it means.
वर्ण — the four ways swaras move:
Other terms — अलंकार or पलटा (a set pattern of swaras practised up and down), पकड़ (the short phrase that identifies a raga), आलाप (slow, rhythm-free unfolding), and तान (fast runs of swaras).
जाति — the number of swaras a raga uses:
| जाति | Swaras |
|---|---|
| औडव | 5 |
| षाडव | 6 |
| संपूर्ण | 7 |
The आरोह and अवरोह may differ, so jatis combine — औडव-संपूर्ण, षाडव-संपूर्ण and so on — giving 9 jatis in all.
The trap: a jati like औडव-संपूर्ण means five swaras going up and seven coming down — the first word is always the आरोह.
संगीत लिखना — स्वरलिपि, वर्ण और जाति
भातखंडे स्वरलिपि — वह पद्धति जिसे अधिकांश विद्यालय पुस्तकें और परीक्षाएँ अपनाती हैं:
| क्या | चिह्न |
|---|---|
| कोमल स्वर | नीचे छोटी रेखा — रे॒ ग॒ ध॒ नि॒ |
| तीव्र म | ऊपर छोटी खड़ी रेखा — म॑ |
| मंद्र सप्तक | स्वर के नीचे बिंदु |
| तार सप्तक | स्वर के ऊपर बिंदु |
| एक मात्रा तक रुका स्वर | उसके बाद डैश — |
विष्णु दिगंबर पलुस्कर की स्वरलिपि भिन्न चिह्न प्रयोग करती है; प्रश्नपत्र बताता है कि कौन-सी पद्धति अभिप्रेत है।
वर्ण — स्वरों के चलने के चार ढंग:
Ragas of the school syllabus
| Raga | थाट | जाति | Swaras to note | वादी / संवादी | Time |
|---|---|---|---|---|---|
| भूपाली | कल्याण | औडव-औडव | म, नि वर्जित | ग / ध | first part of the night |
| भैरव | भैरव | संपूर्ण-संपूर्ण | कोमल रे, कोमल ध | ध / रे | dawn |
| बिलावल | बिलावल | संपूर्ण | all शुद्ध | ध / ग | morning |
| खमाज | खमाज | षाडव-संपूर्ण | रे omitted going up; कोमल नि coming down | ग / नि | second part of the night |
| देस | खमाज | औडव-संपूर्ण | ग, ध omitted going up | रे / प | second part of the night |
What the terms mean
Reading a raga quickly — भूपाली sounds open and bright with only सा रे ग प ध; भैरव, with its komal रे and ध, sounds grave and devotional, fit for dawn; खमाज and देस use both forms of नि, the शुद्ध going up and the कोमल coming down.
The trap: भूपाली and देस both leave out swaras going up, but भूपाली leaves out म and नि both ways, while देस leaves out ग and ध only in the आरोह.
विद्यालय पाठ्यक्रम के राग
| राग | थाट | जाति | ध्यान देने योग्य स्वर | वादी / संवादी | समय |
|---|---|---|---|---|---|
| भूपाली | कल्याण | औडव-औडव | म, नि वर्जित | ग / ध | रात्रि का प्रथम प्रहर |
| भैरव | भैरव | संपूर्ण-संपूर्ण | कोमल रे, कोमल ध | ध / रे | प्रातःकाल |
| बिलावल | बिलावल | संपूर्ण | सब शुद्ध | ध / ग | प्रातःकाल के बाद, दिन का पहला प्रहर |
| खमाज | खमाज | षाडव-संपूर्ण | आरोह में रे वर्जित; अवरोह में कोमल नि | ग / नि | रात्रि का दूसरा प्रहर |
| देस |
The vocal forms — गायन शैलियाँ
| Form | What marks it |
|---|---|
| ध्रुपद | grave and devotional; four parts — स्थायी, अंतरा, संचारी, आभोग; sung to the पखावज, often in चौताल |
| धमार | sung in धमार taal, with themes of Holi and the play of Krishna |
| ख्याल | the main form of today's concerts; बड़ा ख्याल in slow (विलंबित) laya, छोटा ख्याल in fast (द्रुत); two parts, स्थायी and अंतरा |
| तराना | sung to syllables without meaning — ना, दिर, तोम, तनन — at speed; tradition credits Amir Khusrau |
| ठुमरी | light classical, romantic and devotional, in श्रृंगार रस; associated with Lucknow and Banaras |
| दादरा | lighter still, often in दादरा taal |
| टप्पा | quick, twisting phrases, from the songs of Punjab's camel drivers, refined by Shori Miyan |
| भजन and ग़ज़ल | devotional song, and the Urdu love lyric set to music |
Classical, light classical, light — dhrupad, dhamar and khayal are classical; thumri, dadra and tappa are light classical (उपशास्त्रीय); bhajan, ghazal and film song are light.
The trap: ध्रुपद has four parts (स्थायी, अंतरा, संचारी, आभोग); ख्याल has only two (स्थायी, अंतरा) — options often give khayal the dhrupad's four.
गायन शैलियाँ
| शैली | पहचान |
|---|---|
| ध्रुपद | गंभीर और भक्तिपूर्ण; चार भाग — स्थायी, अंतरा, संचारी, आभोग; पखावज के साथ, प्रायः चौताल में |
| धमार | धमार ताल में, होली और कृष्ण लीला के विषयों के साथ |
| ख्याल | आज के संगीत समारोहों की मुख्य शैली; बड़ा ख्याल विलंबित लय में, छोटा ख्याल द्रुत में; दो भाग, स्थायी और अंतरा |
| तराना | अर्थहीन बोलों — ना, दिर, तोम, तनन — पर तेज़ गति से; परंपरा अमीर ख़ुसरो को श्रेय देती है |
| ठुमरी | उपशास्त्रीय, श्रृंगारिक और भक्तिपूर्ण, श्रृंगार रस में; लखनऊ और बनारस से जुड़ी |
| दादरा | और हल्की, प्रायः दादरा ताल में |
| टप्पा | तेज़, घुमावदार वाक्यांश, पंजाब के ऊँट-चालकों के गीतों से, शोरी मियाँ द्वारा परिष्कृत |
| भजन और ग़ज़ल | भक्ति गीत, और संगीतबद्ध उर्दू प्रेम-काव्य |
शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, सुगम
Points to Remember
स्मरणीय बिंदु
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जाति — राग में प्रयुक्त स्वरों की संख्या:
| जाति | स्वर |
|---|---|
| औडव | 5 |
| षाडव | 6 |
| संपूर्ण | 7 |
आरोह और अवरोह भिन्न हो सकते हैं, इसलिए जातियाँ मिलती हैं — औडव-संपूर्ण, षाडव-संपूर्ण आदि — कुल 9 जातियाँ।
जाल: औडव-संपूर्ण जैसी जाति का अर्थ है चढ़ते समय पाँच और उतरते समय सात स्वर — पहला शब्द सदा आरोह का होता है।
| औडव-संपूर्ण |
| आरोह में ग, ध वर्जित |
| रे / प |
| रात्रि का दूसरा प्रहर |
शब्दों के अर्थ
राग को जल्दी पढ़ना — भूपाली केवल सा रे ग प ध के साथ खुला और उजला लगता है; भैरव अपने कोमल रे और ध के साथ गंभीर और भक्तिपूर्ण लगता है, भोर के योग्य; खमाज और देस नि के दोनों रूप प्रयोग करते हैं, चढ़ते में शुद्ध और उतरते में कोमल।
जाल: भूपाली और देस दोनों आरोह में स्वर छोड़ते हैं, पर भूपाली म और नि दोनों ओर छोड़ता है, जबकि देस ग और ध केवल आरोह में छोड़ता है।
जाल: ध्रुपद के चार भाग हैं (स्थायी, अंतरा, संचारी, आभोग); ख्याल के केवल दो (स्थायी, अंतरा) — विकल्प प्रायः ख्याल को ध्रुपद के चार भाग दे देते हैं।