BPSC TRE-3 Primary Hindi Language — Question Paper with Answers
All 18 questions from this paper, with the correct answer marked. Free to read — no sign-up. Transcribed in English, Hindi and Urdu and verified against the official BPSC answer key.
- Q1
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। जनतंत्र के लिए लाभकारी हो सकते हैं
- Aनिष्ठावान श्रमिक
- Bशक्तिशाली सिपाही
- Cउत्तम चरित्रवान व्यक्ति
- Dधनवान व्यक्ति
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: C · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q2
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है
- Aस्वार्थी व्यक्ति
- Bलार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति
- Cपाश्चात्य संस्कृति
- Dचरित्रवान व्यक्ति
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q3
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। अप्रगतिशील रूप में मजाक उड़ाया जाता है, जो
- Aपाश्चात्य संस्कृति को हृदय से अपनाता है
- Bभारतीय संस्कृतिमय जीवन बिताता है
- Cधार्मिक वातावरण में जीवन बिताता है
- Dसत्संग में अधिक समय नहीं बिताता है
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: B · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q4
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। चरित्र निर्माण की परम आवश्यकता है
- Aसमाजोपयोगी कार्यों के लिए
- Bमानवमात्र के कल्याण के लिए
- Cराष्ट्र की योजनाओं के संचालन के लिए
- Dराष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q5
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। उन्नत राष्ट्र के लिए विकास का प्रथम सोपान है
- Aभ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण
- Bचरित्र निर्माण के शैक्षणिक वातावरण
- Cराजनीति के कुशल दाँव-पेंच
- Dजनता में साम्प्रदायिक सद्भाव
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q6
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए चरित्र निर्माण परम आवश्यक है। जिस प्रकार वर्तमान में भौतिक निर्माण का कार्य अनेक योजनाओं के माध्यम से तीव्र गति के साथ संपन्न हो रहा है, वैसे ही वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि देशवासियों के चरित्र निर्माण के लिए भी प्रयत्न किया जाए। उत्तम चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र की सर्वोच्च संपदा है। जनतंत्र के लिए जो यह एक महान कल्याणकारी योजना है। जन-समाज में राष्ट्र, संस्कृति, समाज एवं परिवार के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इसका पूर्ण रूप से बोध कराना एवं राष्ट्र में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार के प्रति निषेधात्मक वातावरण का निर्माण करना ही चरित्र निर्माण का प्रथम सोपान है। पाश्चात्य शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से आज हमारे मस्तिष्क में भारतीयता के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो गई है। चरित्र निर्माण, जो कि बाल्यावस्था व्यवस्था से ही ऋषिकुल, गुरुकुल, आचार्यकुल की शिक्षा के द्वारा प्राचीन समय से किया जाता था, आज की लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से संचालित स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए एक हास्यास्पद विषय बन गया है। आज यदि कोई पुरातन संस्कारी विद्यार्थी संध्यावंदन या शिखा-सूत्र रखकर भारतीय संस्कृतिमय में जीवन बिताता है, तो अन्य छात्र उसे 'बुद्ध' या अप्रगतिशील कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। आज हम अपने भारतीय आदर्शों का परित्याग करके पश्चिम के अंधानुकरण को प्रगति मान बैठे हैं। इसका घातक परिणाम चरित्र दोष के रूप में आज देश में सर्वत्र दृष्टिगोचर हो रहा है। भारतीयता के प्रति हीन भावना का कारण है
- Aपुरातन संस्कारी संस्कृतिमय जीवन
- Bवर्तमान वैज्ञानिक शिक्षा पद्धति
- Cप्राचीन गुरुकुल की शिक्षा पद्धति
- Dलार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q7
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगांतर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमूल्य निधि। इसी से हम अपने पूर्व स्वप्न के लिए, सामंजस्यपूर्ण आदर्श के लिए और उदात्त भावनाओं के लिए प्राण की बाजी लगाते रहे हैं। जब हम से ऐसा करने की शक्ति शेष नहीं रह जाती तब हम एक मिथ्या दम्भ के साथ पशुता की ओर लौट चलते हैं क्योंकि वहाँ पहुँचने के लिए न किसी पराक्रम की आवश्यकता है और न साधन की। हम अपने शरीर को निश्चेष्ट छोड़कर हिमालय के शिखर से पाताल की गहराई तक सहज ही लुढ़कते चले आ सकते हैं। परंतु उसे ऊंचाई के सहस्र अंशो तक पहुँचने में हमारे पाँव काँपने लगेंगे, साँस फूलने लगेगी और आँखों के सामने अंधेरा छा जाएगा। मनुष्य मिथ्या दम्भ के साथ पशुता की ओर लौट चलते हैं
- Aजब सृजनात्मक कार्य करने की शक्ति नहीं रहती
- Bजब ऊर्जा सक्रिय हो
- Cजब कोई पराक्रमी हो
- Dजब स्वार्थ वृति हो
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q8
निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न का सही विकल्प चुनिए। विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगांतर के अनवरत अध्यवसाय से अर्जित अमूल्य निधि। इसी से हम अपने पूर्व स्वप्न के लिए, सामंजस्यपूर्ण आदर्श के लिए और उदात्त भावनाओं के लिए प्राण की बाजी लगाते रहे हैं। जब हम से ऐसा करने की शक्ति शेष नहीं रह जाती तब हम एक मिथ्या दम्भ के साथ पशुता की ओर लौट चलते हैं क्योंकि वहाँ पहुँचने के लिए न किसी पराक्रम की आवश्यकता है और न साधन की। हम अपने शरीर को निश्चेष्ट छोड़कर हिमालय के शिखर से पाताल की गहराई तक सहज ही लुढ़कते चले आ सकते हैं। परंतु उसे ऊंचाई के सहस्र अंशो तक पहुँचने में हमारे पाँव काँपने लगेंगे, साँस फूलने लगेगी और आँखों के सामने अंधेरा छा जाएगा। अवतरण का उपर्युक्त शीर्षक होगा
- Aमनुष्यता की प्राप्ति
- Bमानव जीवन का लक्ष्य
- Cमनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार
- Dपशुता बनाम मनुष्यता
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · बुनियादी समझ
Why this answer? Read the explanation → - Q9
''गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास'' लोकोक्ति का सही अर्थ है
- Aआदर्शवादी
- Bचरित्र हीन
- Cयथार्थवादी
- Dसिद्धान्त हीन
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · मुहावरे एवं वाक्यांश
Why this answer? Read the explanation → - Q10
'अपनाना' क्रिया किस सर्वनाम से बनी है ?
- Aसंज्ञा से
- Bविशेषण से
- Cक्रिया से
- Dसर्वनाम से
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q11
'र' का विवरण है
- Aवर्त्स्य, लुंठित, सघोष, अल्पप्राण व्यंजन
- Bपार्श्विक, सघोष, स्पर्श, अल्पप्राण व्यंजन
- Cवर्त्स्य, लुंठित, अघोष, महाप्राण व्यंजन
- Dवर्त्स्य, संघर्षी, अघोष, महाप्राण व्यंजन
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q12
साधारण वाक्य को मिश्रित वाक्य में बदलिए। ''सीता को देखते ही मुझे रीता की याद आ जाती है।''
- Aजब मैं सीता की ओर देखता हूँ तब मुझे रीता की याद आ जाती है।
- Bजब सीता की ओर देखता हूँ तब मुझे रीता क्यों याद आती है ?
- Cजब मैं सीता की ओर देखता हूँ तब मुझे रीता दिखाई देती है।
- Dमैं सीता की ओर देखता हूँ और मुझे रीता की याद आ जाती है।
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · वाक्य संरचना
Why this answer? Read the explanation → - Q13
प्रयत्न के आधार पर 'ल' किस प्रकार की ध्वनि है ?
- Aपार्श्विक
- Bसंघर्षशील
- Cउत्क्षिप्त
- Dप्रकंपित
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q14
'निराकार' में उपसर्ग है
- Aनिर्
- Bनि
- Cनिरा
- DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q15
''कबीर वाणी के डिक्टेटर थे'' इस वाक्य में किस विराम चिन्ह का प्रयोग हुआ है ?
- Aअल्प विराम
- Bपुनरुक्ति सूचक
- Cउद्धरण चिन्ह
- Dलाघव चिन्ह
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: C · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q16
''मैंने आम ले लिया है।'' का बहुवचन क्या होगा ?
- Aहमने आम ले लिये हैं।
- Bमैंने आम लिए है।
- Cमैंने आम ले लिये है।
- Dहमने आम ले लिये।
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q17
छन्द पढ़ते समय आने वाले विराम को क्या कहते हैं ?
- Aगति
- Bलय
- Cगण
- Dयति
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: D · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation → - Q18
जिस समास में दोनों पद प्रधान होता है, उसे क्या कहते हैं ?
- Aद्वन्द्व समास
- Bबहुव्रीहि समास
- Cअव्ययी समास
- Dद्विगु समास
- ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں
Correct answer: A · व्याकरण
Why this answer? Read the explanation →
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