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BPSC TRE-3 Secondary Hindi Language — Question Paper with Answers

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  1. Q1

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' राम प्रसाद के जीवन में परिवर्तन कब आया?

    • Aक्रांतिकारियों के संपर्क में आने पर
    • Bजब अमरीका को स्वतंत्रता मिली
    • Cजब वे आर्य समाज के संपर्क में आए
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · बुनियादी समझ

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  2. Q2

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' बिस्मिल ने धन की समस्या कैसे हल की?

    • Aसरकारी खज़ाना लूटकर
    • Bचंदा इकट्ठा करके
    • Cग़रीबों को लूटकर
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: A · बुनियादी समझ

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  3. Q3

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' बिस्मिल महान क्रांतिकारी क्यों कहलाए?

    • Aक्योंकि उन्हें फाँसी की सज़ा दी गई।
    • Bक्योंकि उन्होंने पुस्तकें लिखीं।
    • Cक्योंकि उन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया।
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · बुनियादी समझ

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  4. Q4

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' 'सजग' में मूल शब्द है :

    • Aसज
    • Bजग
    • Cग
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · शब्द भंडार

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  5. Q5

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' 'स्वतंत्रता' शब्द का विलोम है :

    • Aगणतंत्रता
    • Bलोकतंत्रता
    • Cप्रजातंत्रता
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: E · शब्द भंडार

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  6. Q6

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – पंडित राम प्रसाद बिस्मिल उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने अपने कार्यों से अंग्रेज़ी हुकूमत को हिला दिया था। जब राम प्रसाद आर्य समाज के संपर्क में आए, इनके जीवन में क्रांति आ गई, इनमें बुराइयों का सामना करने का साहस जाग उठा। उन दिनों स्वतंत्रता आंदोलन ज़ोर पर था। राम प्रसाद को पता चला कि क्रांतिकारी युवक देश में सजग हैं तथा देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने को तैयार हैं। बिस्मिल क्रांतिकारी संगठन के सदस्य बन गए। इन्होंने एक पुस्तक भी लिखी– 'अमरीका को स्वतंत्रता कैसे मिली?' इनकी 'स्वदेश–रंग' नामक पुस्तक बहुत प्रसिद्ध है। आंदोलन में धन की कमी एक बहुत बड़ी समस्या थी। धन जुटाने के लिए इन्होंने किसी दीन–हीन को नहीं सताया, बल्कि अंग्रेज़ों का सरकारी खज़ाना लूटने की योजना बनाई। इन्होंने 9 अगस्त, 1925 को काकोरी स्टेशन पर धन लूटकर स्वाधीनता संग्राम में लगा दिया। इसके लिए इनपर मुकदमा चलाया गया। इन्हें फाँसी की सज़ा दी गई। पंडित बिस्मिल ने 26-27 वर्ष की आयु में वह कार्य कर दिखाया, जो लंबी आयु जीने वाले भी नहीं कर पाते। ये एक कवि भी थे, इनकी ये पंक्तियाँ समय–समय पर हमें प्रेरणा देती हैं : 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाजु ए–कातिल में है।।' 'लंबी आयु जीने वाला' वाक्यांश के लिए एक शब्द है –

    • Aलंबायु
    • Bदीर्घायु
    • Cअल्पायु
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · शब्द भंडार

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  7. Q7

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मनुष्य का जीवन श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?

    • Aक्योंकि वह सफल है
    • Bक्योंकि वह बुद्धिमान और कल्पनाशील है
    • Cक्योंकि वह परिश्रमी और कठोर है
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · बुनियादी समझ

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  8. Q8

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। उन्नति करने के लिए मनुष्य के विचार कैसे होने चाहिए?

    • Aझूठे, ऊँचे और अपवित्र
    • Bबेबुनियाद
    • Cमोह–माया से युक्त
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: E · बुनियादी समझ

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  9. Q9

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। वास्तविक सादगी क्या है?

    • Aवैचारिक और व्यावहारिक
    • Bमनुष्य का पहनावा
    • Cमनुष्य का दिखावा
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: A · बुनियादी समझ

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  10. Q10

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'उन्नति' शब्द का उचित विलोम शब्द है :

    • Aप्रोन्नति
    • Bपदोन्नति
    • Cअवनति
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · शब्द भंडार

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  11. Q11

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'महान है जो आत्मा' का समास है :

    • Aकर्मधारय समास
    • Bअव्ययीभाव समास
    • Cतत्पुरूष समास
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: A · व्याकरण

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  12. Q12

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'प्रत्येक' शब्द का सही वर्ण–विच्छेद है –

    • Aप् + र् + आ + त् + अ + य् + ए + क्
    • Bप् + र् + अ् + त् + अ + य् + ए + क् + अ
    • Cप् + र् + अ + त् + य् + ए + क् + अ
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · व्याकरण

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  13. Q13

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। निम्नलिखित में से वृद्धि संधि का उदाहरण है –

    • Aपित्रादेश
    • Bगिरीश
    • Cमहौजस्वी
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · व्याकरण

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  14. Q14

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। निम्नलिखित में से शुद्ध वर्तनी है –

    • Aअद्वितिय
    • Bअद्वितीय
    • Cअद्वित्तीय
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · शब्द भंडार

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  15. Q15

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। निम्नलिखित में से जातिवाचक संज्ञा है –

    • Aबहन
    • Bमंत्री
    • Cजुलाहा
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: D · व्याकरण

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  16. Q16

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'चंद्रमा' का पर्यायवाची है –

    • Aराकेश
    • Bसारंग
    • Cआदित्य
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: D · शब्द भंडार

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  17. Q17

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'स्थिर' का विलोम शब्द है –

    • Aचंचल
    • Bअस्थिर
    • Cनिर्विकार
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: D · शब्द भंडार

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  18. Q18

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'मैं एक लीटर दूध पीता हूँ' – में विशेषण शब्द है –

    • Aमैं
    • Bएक लीटर
    • Cदूध
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · व्याकरण

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  19. Q19

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। निम्नलिखित वाक्यांश के लिए एक शब्द बताइए – 'कम बोलनेवाला'

    • Aमितभाषी
    • Bवाचाल
    • Cमिष्टभाषी
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: A · शब्द भंडार

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  20. Q20

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'उदासीन हो जाने' के लिए सही मुहावरा है –

    • Aआँखें चुराना
    • Bआँखों में गड़ना
    • Cआँखें फेर लेना
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: C · मुहावरे एवं वाक्यांश

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  21. Q21

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए – मनुष्य का जीवन संसार के छोटे–बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ–साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर 'सादा जीवन, उच्च विचार' को मानव–जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव–भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। 'निरपराध' में उपसर्ग है –

    • Aनि
    • Bनिर्
    • Cनिस्
    • DMore than one of the aboveउपर्युक्त में से एक से अधिकمذکورہ بالا میں سے ایک سے زیادہ
    • ENone of the aboveउपर्युक्त में से कोई नहींمذکورہ بالا میں سے کوئی نہیں

    Correct answer: B · व्याकरण

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